आपने धूमधाम से जन्माष्टमी मनाई, पर यक़ीन मानिए, जन्माष्टमी का इससे बेहतर ज़श्न कहीं हो ही नहीं सकता, इन बच्चों के साथ, ये तस्वीरें हैं देवरिया के स्टेशन रोड के नारी निकेतन और बाल गृह केंद्र की, छोटे छोटे मासूम निराश्रित बच्चे, जिनमें अधिकांश को ये तक नहीं पता कि उनके माता -पिता कौन हैं, ये बच्चे नन्हीं सी उम्र में ही ज़िंदगी की तमाम दुश्वारियां झेल रहे हैं, ऐसे में माँ बाप की भूमिका निभा रही हैं श्रीमती गिरिजा त्रिपाठी जी और श्रीमती कंचन जी, इनकी लगन देख मुरीद हो गया, वे सिर्फ इन बच्चों की देखरेख का दायित्व ही नहीं निभा रहीं, बल्कि अपने बच्चों जैसा स्नेह भी दे रहीं हैं, यही बड़ी बात है, काफ़ी वक्त इन बच्चों के साथ गुज़ारा, उनका परफ़ॉर्मेंस भी देखा, ये महसूस हुआ कि अद्भुत प्रतिभा है इन बच्चों में, शायद यही ईश्वर की लीला है, संकट भी देते हैं तो संकट से लड़ने की ताक़त भी, यही ताक़त इन नन्हे मुन्नों में भी नज़र आई, रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हम अपनी ख़ुशियों के बीच थोड़ा भी इन बच्चों को दे पाएँ तो ये शायद सबसे बड़ी पूजा होगी, धन्यवाद
Monday, October 2, 2017
आपने धूमधाम से जन्माष्टमी मनाई, पर यक़ीन मानिए, जन्माष्टमी का इससे बेहतर ज़श्न कहीं हो ही नहीं सकता, इन बच्चों के साथ, ये तस्वीरें हैं देवरिया के स्टेशन रोड के नारी निकेतन और बाल गृह केंद्र की, छोटे छोटे मासूम निराश्रित बच्चे, जिनमें अधिकांश को ये तक नहीं पता कि उनके माता -पिता कौन हैं, ये बच्चे नन्हीं सी उम्र में ही ज़िंदगी की तमाम दुश्वारियां झेल रहे हैं, ऐसे में माँ बाप की भूमिका निभा रही हैं श्रीमती गिरिजा त्रिपाठी जी और श्रीमती कंचन जी, इनकी लगन देख मुरीद हो गया, वे सिर्फ इन बच्चों की देखरेख का दायित्व ही नहीं निभा रहीं, बल्कि अपने बच्चों जैसा स्नेह भी दे रहीं हैं, यही बड़ी बात है, काफ़ी वक्त इन बच्चों के साथ गुज़ारा, उनका परफ़ॉर्मेंस भी देखा, ये महसूस हुआ कि अद्भुत प्रतिभा है इन बच्चों में, शायद यही ईश्वर की लीला है, संकट भी देते हैं तो संकट से लड़ने की ताक़त भी, यही ताक़त इन नन्हे मुन्नों में भी नज़र आई, रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हम अपनी ख़ुशियों के बीच थोड़ा भी इन बच्चों को दे पाएँ तो ये शायद सबसे बड़ी पूजा होगी, धन्यवाद
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