
दुनिया के कुछ नियम हैं। कुछ हिसाब किताब हैं और कुछ अपनी सीमायें हैं। मनुष्य बंधा हुआ है। कभी नियति के हाथों से, कभी ख़ुद की बनायी हुई परिस्थितियों से और कभी अपने आप से । ब्लॉग की दुनिया मुक्त है और हर जीव को मुक्त उड़ान की लालसा ही इस स्लेट तक खींच लाती है। मैं विद्युत संजाल का पुराना खिलाडी हूँ लेकिन ब्लॉग स्पाट की दुनिया में नया हूँ। जाहिर है नए आदमी को पुराने लोगों के सहयोग और प्यार की जरूरत होती। मैं चाहूंगा कि मुझे लोग यहाँ भी पढ़ें और जिस तरह आईबीएन 7 पर मुझे देखकर आप लगातार फोन करके या मेल से हौसला बढाते हैं उसी तरह यहाँ भी आप सबका प्यार मिलेगा।
आप सबका
शलभ

वाह ! शलभ जी आप भी नए.........मैं भी नया.........
ReplyDeleteये भी खूब रही.......
आपको बधाई...........आप से बहुत अपेक्षाएं रहेंगी.......
आईये, स्वागत है!
ReplyDeleteशलभ भाई !!स्वागतम !!
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